Tuesday, February 12, 2013

इलाहाबाद हादसा कुम्भ  और कॊव!रोर
                         हर बार की तरह इस बार भी हादसे से निपटना छोड़ सपा और कांग्रेस तेरी गलती मेरी सफाई खेलने में जुट गए है .जितनी देर हो सकती थी की गयी घायल रामभरोसे रहे जो नहीं बर्दाश्त कर सके वे अपने
रामजी के पास पहुँच गए .उन्हें मुक्ति मिली या नहीं यह जानने का कोई साधन अभी अपने पास नहीं है।हाँ अपने पास है असवेंदन शील प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार गैरजिम्मेदार राजनीतिक और जनता की अपेछाओं
को अपनी सोच समझ से नियंत्रित करते अफसर .धार्मिक आस्थाओ और अपने संसाधनों के साथ जीवन को बेहतर ढंग से जीने की    लालसा लिए महान भारतीय जन .इस भारतीय जन का साहस अभी शिव रात्रि के पर्व पर देखने को मिलेगा जब एक बार फिर उसी आस्था और उत्साह के साथ अमृत की बूंदों को पाने फिर कुम्भ
स्थल पहुंचेगा .परसाई जी ने एक बार कहा था कि धर्म से नहीं लड़ा जा सकता है .कुम्भ 54 के हादसा हो या 2013का हादसा सरकार और राजनीति अपनी तूतू मैंमैं में लगे रहें .लेकिन महान भारतीय जन अपनी धार्मिक आस्थायो पर अडिग बने रहेंगे और कुम्भ और पर्वों पर स्नान ध्यान अनवरत चलते रहेंगे .

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