Friday, February 15, 2013

valentine और कुम्भ
                            आख़िरकार जैसे तैसे दोनों ही कुम्भ भारी जन हानि के साथ प्रेम दिवस थोड़ी हलकी मार पिटाई के साथ .जबसे प्रेमदिवस देसी बाज़ार में आया है तभी से बहस चल रही हर बार लोग पुण्यतिथि की तरह
शोक भरे अंदाज़ में संवेदना प्रकट करते दिखाई पड़ते है .मुझे मनाने वालों का लाजिक तो फिर भी समझ आता है ,विरोधियों का रुख नहीं समझ आता है .अगर बात आर्थिक पछ की है तो मर्दों की परेशानी जायज़ है .जन्मदिन शादी की वर्ष गांठ करवा चौथ करते बजट ढीला हो जाता है अब एक और गिफ्ट बड़ी नाइंसाफी है ,लेकिन बजरंग दल और शिव सेना का कष्ट क्या है?गिफ्ट के अलावा जलन मुद्दा है बजरंग बली का प्यार मोहब्बत से क्या लेना देना ?पर शंकर भगवान तो प्रेम के देवता ठहरे सारी कुवारियां सोलह सोमवार शंकर जी के आगे माथा टेक कर एक अदद पति पाती है ,सती के प्रेम दुनिया मिटाने को तैयार शिव के गण प्रेमियों के प्रेम महल क्यों  ध्वंस करने जुट जाते है .एक बात हो सकती ऐसे लोगो के लिए एक नफरत दिवस शुरू किया जाय और गाली थूकने और कोसने की प्रतियोगिताएं रखी जाएँ ,जिससे इन प्रेम के दुश्मनों की दिल की जलन कुछ कम हो और शायद दुनिया में नफरत भी कम हो सके और फिर प्रेम दिवस से इन्हें परेशानी न हो .संत वैलेंटाइन को याद   करते हुए प्यार बाटने की कोशिश में लगते है ,शायद अगली सदी प्यार के नाम हो .आमीन . 

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