आतंकवाद यानी शिंदे बताएं ?
अभी कुछ दिन हुए गृहमंके म त्री ने जिम्मेदारी भरा बयानदिया था भगवा आतंकवाद के बढ़ावा देनेवाले संघ के बारे में जिसको सही ठहराने के लिए पूरी कांग्रेस ब्रिगेड मीडिया में कूद पड़ी थी .अब जबसे विश्वरूप फिल्म का विवाद आरम्भ हुआ है , पूरे देश का मीडिया और चिन्तक तो दिख रहे हैं सबकी चिंता रचनात्मकता की आजादी को लेकर रहे हैं .तथाकथित मुस्लिम संगठनों की दादागिरी और कानून की धज्जियाँ उड़ाते देख्र रहें है जिसकी चिंता किसी को नहीं है सबको मुस्लिम संवेदनायों को आहत होने की फ़िक्र ज्यादा है . देश के संवेधानिक ढाचे पर होते प्रहार पर किसी की नजर भी नहीं पड़ रही है .मुस्लिम वोट की लालच ने सभी राजनेतिक दलों का मुह सी दिया है और मुस्लिम जनता के तथाकथित ठेकेदारों की बन आयी है और वे ब्लेकमेलिंग का धंधा चमका रहें है जिसमे तमिलनाड की सरकार और अन्य प्रदेशों के शासन उन्हें बढ़ावा दे रहें हैं।वर्ना सूचना मंत्री मनीष तिवारी के बयान के बाद कि सेंसर बोर्ड से पास हो जाने के बाद फिल्म चलाना प्रशासन की जिम्मदारी है .तब जयललिता का यह बयान कि कमल हासन मुस्लिम संगठनो से बात कर बीच का रास्ता निकालेंयानीशहर में रहना है तो गुंडों से समझोता करलो यह जनता की जिम्मेदारी है .मुस्लिम संगठन इतने बद्जोक है जो एक घंटे संतालिस मिनट की फिल्म से एक घंटे की फिल्म काटने का हुकुम दे रहें है जिससे साफ़ साबित होता है बात धर्म या सवेदना केआहत होने की हैही नहीं बल्कि आतंकवाद को प्रोटेक्ट करने की है या फिर प्रदेश सरकार का कोई छिपा एजेंडा है .इस घटना से अगर भारतीय मुस्लिमो को आतंकवादियों से जोड़ते है तो क्या गलत करते है ?अगर मुस्लिम संगठन इससे बचना चाहते है तो हर बार इस तरह की ब्लेकमेलिंग से बाज आयें .शिंदे जी बिल से बाहर आकर कुछ सही समझदारी भरा बयान दे वोट के लिए देश को तोड़ने की कोशिश न करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा बाकी वोटरों की भावनाएं भी बहुत आहत होती उसका भी कभी कभी ध्यान दें
अभी कुछ दिन हुए गृहमंके म त्री ने जिम्मेदारी भरा बयानदिया था भगवा आतंकवाद के बढ़ावा देनेवाले संघ के बारे में जिसको सही ठहराने के लिए पूरी कांग्रेस ब्रिगेड मीडिया में कूद पड़ी थी .अब जबसे विश्वरूप फिल्म का विवाद आरम्भ हुआ है , पूरे देश का मीडिया और चिन्तक तो दिख रहे हैं सबकी चिंता रचनात्मकता की आजादी को लेकर रहे हैं .तथाकथित मुस्लिम संगठनों की दादागिरी और कानून की धज्जियाँ उड़ाते देख्र रहें है जिसकी चिंता किसी को नहीं है सबको मुस्लिम संवेदनायों को आहत होने की फ़िक्र ज्यादा है . देश के संवेधानिक ढाचे पर होते प्रहार पर किसी की नजर भी नहीं पड़ रही है .मुस्लिम वोट की लालच ने सभी राजनेतिक दलों का मुह सी दिया है और मुस्लिम जनता के तथाकथित ठेकेदारों की बन आयी है और वे ब्लेकमेलिंग का धंधा चमका रहें है जिसमे तमिलनाड की सरकार और अन्य प्रदेशों के शासन उन्हें बढ़ावा दे रहें हैं।वर्ना सूचना मंत्री मनीष तिवारी के बयान के बाद कि सेंसर बोर्ड से पास हो जाने के बाद फिल्म चलाना प्रशासन की जिम्मदारी है .तब जयललिता का यह बयान कि कमल हासन मुस्लिम संगठनो से बात कर बीच का रास्ता निकालेंयानीशहर में रहना है तो गुंडों से समझोता करलो यह जनता की जिम्मेदारी है .मुस्लिम संगठन इतने बद्जोक है जो एक घंटे संतालिस मिनट की फिल्म से एक घंटे की फिल्म काटने का हुकुम दे रहें है जिससे साफ़ साबित होता है बात धर्म या सवेदना केआहत होने की हैही नहीं बल्कि आतंकवाद को प्रोटेक्ट करने की है या फिर प्रदेश सरकार का कोई छिपा एजेंडा है .इस घटना से अगर भारतीय मुस्लिमो को आतंकवादियों से जोड़ते है तो क्या गलत करते है ?अगर मुस्लिम संगठन इससे बचना चाहते है तो हर बार इस तरह की ब्लेकमेलिंग से बाज आयें .शिंदे जी बिल से बाहर आकर कुछ सही समझदारी भरा बयान दे वोट के लिए देश को तोड़ने की कोशिश न करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा बाकी वोटरों की भावनाएं भी बहुत आहत होती उसका भी कभी कभी ध्यान दें
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